भारत की  माटी

भारत की माटी

बात है उस वक्त की जब भारत कि माटी मांग रही थी खून और हर माँ को डर था कही छीन ना जाए उससे उसका खून हर कोई चाहता था आजाद होना लकिन किसी के वश मे ना था अंग्रेजी हुकूमत को झुकाना चन्द कीमतों मे बिक गया राजा महाराजाओ और गद्दारों का ईमान जिसकी कीमत चुका रहा था भारत का हर एक इंसान उसी वक़्त अहिंसा के एक पुजारी ने खाई कसम कुछ भी हो जाए पर भारत को होने ना दूंगा खत्म उसी वक़्त बापू ने लगाई अंग्रेजो को अपने संघर्ष की फटकार और अंग्रेजो को मार भगाया भारत के बाहार

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प्यारा है ये इश्क

प्यारा है ये इश्क

प्यारा है ये इश्क जो ना डूबे इसमें बहुत पछतायेगा और जो डूब गया इसमें उसे कुछ ना दिख पायेगा उसके लिए होगी ना कभी चाहत कम चाहे वो मुझे देखे भी ना मुड के एक कदम हर वक़्त उसे याद करूंगा उसी की यादो मे खोया रहूँगा ढूढूगा उसे हर ख़ुशी मे जिन्दगी मे ना सही पर यादो मे तो है क्योंकि किसी ने कहा है की चाहत जितनी बड़ी होगी मंजिल उतनी करीब होगी !प्यारा है ये इश्क .....

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