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मानव स्वभाव

मानव स्वभाव ही ऐसा है, कि हम बिना उत्सवों, के नहीं रह सकते, उत्सव प्रिय होना, मानव स्वभाव है, हमारे त्यौहार होने, ही चाहियें। Bal Gangadhar Tilak

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